इन्फ्रास्पाइनेटस स्कैपुला यानी कंधे के पीछे की चपटी हड्डी की पिछली सतह पर स्थित रोटेटर-कफ की मांसपेशी है। यह बाँह को बाहर घुमाने और वज़न उठाते समय कंधा स्थिर रखने में मदद करती है। कंधे में दर्द के साथ मांसपेशी दबाने पर संवेदनशीलता मिल सकती है। लेकिन कमज़ोरी, रात का दर्द और हाथ आगे बढ़ाने में कठिनाई टेंडन की बीमारी, फटाव, जोड़ की अकड़न या गर्दन की समस्या में भी होते हैं।
शरीर का क्षेत्र
कंधा
ट्रिगर पॉइंट्स
3
इस मांसपेशी में दर्ज
आम लक्षण
4
दर्ज पैटर्न
आम कारण
4
योगदान देने वाले कारक
मांसपेशी का परिचय
लक्षण और शुरुआती कदम
शुरुआत में क्या करें
जिस ऊँचाई या वज़न पर सबसे अधिक दर्द होता है, उसे कुछ समय कम करें। कंधे की आरामदायक गति बनाए रखें।
आराम या नींद के समय अग्रबाहु के नीचे तकिया रखकर देखें और बार-बार काम आने वाली चीज़ें पास रखें।
बाँह बाहर घुमाने की ताक़त हल्के प्रयास से बढ़ाएँ। ज़ोरदार स्लीपर स्ट्रेच और स्कैपुला के किनारों से बाहर गहरा दबाव देने से बचें।
जाँच कब करवाएँ
चोट के बाद अचानक कमज़ोरी, बाँह न उठा पाना, कंधा उतरने की आशंका या बुख़ार के साथ गर्म सूजा कंधा हो तो जल्द जाँच कराएँ।
कमज़ोरी बनी रहे, मांसपेशी सिकुड़ती दिखे, बाँह सुन्न हो या सहारे से भी कंधा हिलाने की सीमा घटती जाए तो डॉक्टर से जाँच कराएँ।
सीने में दर्द, साँस फूलना या कंधे के दर्द के साथ अचानक पूरे शरीर की अस्वस्थता हो तो तत्काल चिकित्सा सहायता लें। इसे केवल मांसपेशी का दर्द न मानें; भारत में आपात मदद के लिए 112 पर कॉल करें।
प्रतिरोध के विरुद्ध बाहर घुमाने और बाहर घुमाई स्थिति बनाए रखने के टेस्ट कंधे की पिछली रोटेटर-कफ मांसपेशियों का काम परखते हैं। स्थिति न टिके और बाँह अंदर लौटने लगे तो फटाव की आशंका बढ़ सकती है; स्थिति टिक जाने से फटाव खारिज नहीं होता। इनमें से कोई टेस्ट इन्फ्रास्पाइनेटस के ट्रिगर पॉइंट का निदान नहीं करता।
नीला रंग संबंधित मांसपेशी को दिखाता है। क्रॉस के निशान ट्रिगर पॉइंट के कुछ उदाहरण हैं। छायांकित हिस्से बताते हैं कि रेफ़र्ड पेन कहाँ महसूस हो सकता है। ये उदाहरण नीचे दिए गए हर क्रमांकित बिंदु से अलग-अलग मेल नहीं खाते। दर्द का फैलाव हर व्यक्ति में अलग हो सकता है; इस चित्र से दर्द के कारण का निदान नहीं किया जा सकता।
मांसपेशी के क्षेत्र का संदर्भ चित्र; यह चुने गए क्रमांकित ट्रिगर पॉइंट का अलग मानचित्र नहीं है।
दर्द कहाँ महसूस होता है। कंधे के सामने, हाथ के नीचे की ओर
दर्द का पैटर्न
कंधे का अगला हिस्सा
हाथ के सामने वाला हिस्सा नीचे की ओर
बाइसेप्स (biceps) क्षेत्र
कलाई
ऊपरी पीठ
यह दर्द कैसा महसूस होता है
बाँह उठाते या घुमाते समय दर्द महसूस हो सकता है। केवल जगह देखकर मांसपेशी और रोटेटर-कफ टेंडन के दर्द में फ़र्क़ नहीं किया जा सकता। मांसपेशी छोटी हो गई है, यह मानने के बजाय कोई खास काम लिखें—जैसे जैकेट पहनना या शेल्फ़ तक हाथ पहुँचाना।
कंधे के पीछे या बाहरी हिस्से में दर्द बाँह उठाते या घुमाते समय दर्द महसूस हो सकता है। केवल जगह देखकर मांसपेशी और रोटेटर-कफ टेंडन के दर्द में फ़र्क़ नहीं किया जा सकता।
हाथ आगे बढ़ाने या कपड़े पहनने में कठिनाई मांसपेशी छोटी हो गई है, यह मानने के बजाय कोई खास काम लिखें—जैसे जैकेट पहनना या शेल्फ़ तक हाथ पहुँचाना।
बाँह बाहर घुमाने पर दर्द इस गति में पिछली रोटेटर-कफ पर भार पड़ता है। जाँच में देखना चाहिए कि दर्द के कारण प्रयास कम है या ताक़त सच में काफ़ी घट गई है।
दर्द से नींद टूटना करवट सोना असहज हो सकता है, लेकिन रात का दर्द ट्रिगर पॉइंट का विशिष्ट संकेत नहीं है।
आम कारण
सिर के ऊपर काम या घुमाव की मात्रा बढ़ना फेंकना, तैरना या नए ढंग से वज़न उठाना कंधे की मौजूदा क्षमता से अधिक भार डाल सकता है।
बाँह को बिना सहारे देर तक रखना चीज़ों तक पहुँचने की दूरी घटाना या अग्रबाहु को सहारा देना आराम बढ़ा सकता है। इसके लिए हर समय एक ही तय मुद्रा में रहना ज़रूरी नहीं।
पुरानी चोट या घटी हुई ताक़त हाल की चोट या लगातार कम बल लगा पाना जाँच और भार बढ़ाने की योजना बदलता है।
बार-बार नींद टूटना या पर्याप्त आराम न मिलना इससे दर्द और गतिविधि सहने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। यह ऊतक की क्षति या ट्रिगर पॉइंट का प्रमाण नहीं है।
स्वास्थ्य पेशेवरों और निगरानी में प्रशिक्षण के लिए
नैदानिक संदर्भ
नक्शे से जाँच का क्षेत्र समझें। आपका परिचित दर्द वास्तव में कहाँ-कहाँ होता है, इसे गति, भार की प्रतिक्रिया और नसों की जाँच के साथ दर्ज करें।
बनावट और दबाकर जाँच
+
आसपास की संरचनाओं से संबंध
इन्फ्रास्पाइनेटस स्कैपुला की पिछली उभरी रेखा के नीचे की सतह पर रहता है। इसका टेंडन बाँह की हड्डी, ह्यूमरस, के ग्रेटर ट्यूबरकल की बीच वाली सतह से जुड़ता है। दूसरी रोटेटर-कफ मांसपेशियों के साथ यह बाँह बाहर घुमाता और ह्यूमरस के सिर को जोड़ में स्थिर रखने में मदद करता है।[6]
स्कैपुलर स्पाइन स्कैपुला की पिछली सतह पर आड़ी उभरी रेखा है, जो उस सतह को बाँटती है।
इस रेखा के नीचे, स्कैपुला के अंदरूनी और बाहरी किनारों के बीच की चौड़ी हड्डी वाली सतह को इन्फ्रास्पाइनस फ़ॉसा कहते हैं।
टेंडन पोस्टीरियर डेल्टॉइड के नीचे से बाहर की ओर ह्यूमरस तक जाता है।
आसपास की संरचनाएँ। टेरेस माइनर नीचे-बाहर की ओर रहता है। सुप्रास्कैपुलर नर्व स्पाइनोग्लेनॉइड नॉच के आसपास से गुज़रती है; स्कैपुला की सीमाओं के बाहर वक्ष और फेफड़ों का क्षेत्र है। मांसपेशी का मांसल हिस्सा स्कैपुला की पिछली सतह पर है, स्कैपुला और रीढ़ के बीच नहीं।
दबाकर जाँच
मरीज़ की स्थिति। बैठकर अग्रबाहु को सहारा दिया जाता है। दूसरा विकल्प करवट लेटना है, जिसमें दर्द वाला कंधा ऊपर और ढीला रहता है।
शारीरिक पहचान-स्थल खोजें
स्कैपुलर स्पाइन और स्कैपुला के दोनों किनारों को पहले पहचानें।
जाँच उभरी रेखा के नीचे चौड़े इन्फ्रास्पाइनस फ़ॉसा पर रहे। इसे स्कैपुला के अंदरूनी किनारे और रीढ़ के बीच की मांसपेशियों से अलग समझें।
जाँच का क्रम
डॉक्टर या फिजियोथेरेपिस्ट मांसपेशी के पिछले मांसल हिस्से पर उँगलियों के पोर सपाट रखकर हल्का स्पर्श करते हैं। बाँह को बाहर घुमाने का छोटा प्रयास संकुचन की दिशा समझा सकता है; दबाकर जाँचने से पहले फिर ढीला छोड़ दिया जाता है।
जाँच के दौरान बताएँ कि संवेदनशील जगह दबाने से आपका परिचित कंधे का दर्द लौटता है या नहीं। इसकी तुलना टेंडन पर भार देने और गर्दन हिलाने की प्रतिक्रिया से की जाती है।
जाँच के निष्कर्ष दर्ज करें
संवेदनशील तनी हुई पट्टी से परिचित रेफ़र्ड पेन महसूस हो तो मांसपेशी की भूमिका की संभावना को समर्थन मिल सकता है।
दबाने पर दर्द रोटेटर-कफ की बीमारी के साथ भी हो सकता है। थोड़ी देर राहत मिलने से फटाव खारिज नहीं होता।
सीमाएँ और सावधानियाँ
स्कैपुला की उभरी रेखा, बाहरी नॉच या हड्डी के किनारों से बाहर कड़ा दबाव न दें।
बाँह में झुनझुनी या बिजली जैसा दर्द हो तो दबाव रोकें।
स्कैपुला के पास नसें, रक्त वाहिकाएँ और वक्ष होने के कारण नीडलिंग केवल संबंधित शारीरिक रचना और तकनीक में प्रशिक्षित पेशेवर करें। यह स्वयं सुई लगाने की विधि नहीं है।
पिछली रोटेटर-कफ पर भार देकर दर्द और घटे बल को अलग-अलग परखना।
स्थिति
बैठें और कोहनी शरीर के पास 90 डिग्री मोड़कर रखें। छोटा तौलिया कोहनी को सहारा दे सकता है।
तरीक़ा
डॉक्टर या फिजियोथेरेपिस्ट ऊपरी बाँह स्थिर रखते हुए अग्रबाहु बाहर घुमाने के विरुद्ध धीरे-धीरे प्रतिरोध बढ़ाते हैं। दोनों तरफ़ की तुलना में दर्द और बल अलग दर्ज होते हैं।
सकारात्मक निष्कर्ष
कंधे का परिचित दर्द, कम बल लगना या समान प्रतिरोध के विरुद्ध स्थिति न टिकना।
निष्कर्ष का अर्थ
यह रोटेटर-कफ से जुड़ी जाँच में उपयोगी है। स्पष्ट कमज़ोरी हो तो फटाव या सुप्रास्कैपुलर नर्व की समस्या पर भी विचार चाहिए।
सीमाएँ
दर्द से बल कम हो सकता है और टेरेस माइनर भी इस गति में काम करता है। सकारात्मक नतीजा इन्फ्रास्पाइनेटस को अकेले नहीं परखता और ट्रिगर पॉइंट का निदान नहीं करता।
बाँह शरीर के पास रखकर बाहरी घुमाव बनाए रखने का लैग टेस्ट[7][8]
पिछली रोटेटर-कफ के फटाव की आशंका में देखना कि सहारे से बाहर घुमाई स्थिति आप खुद बनाए रख सकते हैं या नहीं।
स्थिति
बैठी स्थिति में कोहनी 90 डिग्री मुड़ी और कंधा स्कैपुला के तल में थोड़ा उठा रहता है। डॉक्टर बाँह को सहारा देते हैं।
तरीक़ा
डॉक्टर कंधे को धीरे से उपलब्ध निष्क्रिय बाहरी घुमाव की सीमा के पास ले जाते हैं, फिर थोड़ा वापस लाते हैं। आपसे स्थिति बनाए रखने को कहते हुए कलाई का सहारा हटाते हैं; कोहनी का सहारा बना रहता है।
सकारात्मक निष्कर्ष
बाहर घुमाई स्थिति न टिकने के कारण अग्रबाहु अंदर की ओर लौटने लगती है।
निष्कर्ष का अर्थ
साफ़ लैग मिलने पर रोटेटर-कफ फटने की चिंता बढ़ती है और बाकी क्लिनिकल संकेत मेल खाएँ तो आगे की जाँच उचित हो सकती है।
सीमाएँ
रोटेटर-कफ पर हुए आरओडब्ल्यू अध्ययन में इस टेस्ट की विशिष्टता अधिक, लेकिन संवेदनशीलता कम थी: नकारात्मक नतीजा फटाव खारिज नहीं करता। दर्द, सहारे से गति की सीमा कम होना और नस से जुड़ी कमज़ोरी प्रदर्शन बदल सकते हैं। यह ट्रिगर-पॉइंट टेस्ट नहीं है।
कंधे की अपनी और सहारे से होने वाली गति की तुलना, साथ में गर्दन की जाँच[3][4][5]
भार-संबंधी कंधे की समस्या को जोड़ की अकड़न या गर्दन से महसूस होने वाले रेफ़र्ड पेन से अलग समझना।
स्थिति
खुद बाँह उठाने और गर्दन हल्की हिलाने की जाँच बैठकर होती है। सहारे से कंधा हिलाने के लिए पीठ के बल या बैठी आरामदायक स्थिति इस्तेमाल की जाती है।
तरीक़ा
अपनी ताक़त से बाँह उठाने और घुमाने की तुलना डॉक्टर की मदद से उपलब्ध गति से होती है। काम और दर्द की जगह दर्ज करें। फिर देखा जाता है कि गर्दन की गति या नसों की जाँच से वही बाँह की शिकायत उभरती है या नहीं।
सकारात्मक निष्कर्ष
सहारे से गति में भी स्पष्ट रुकावट, उपलब्ध सहारे वाली गति की तुलना में खुद बहुत कम हिला पाना, या शिकायत से मेल खाते गर्दन और नस के निष्कर्ष।
निष्कर्ष का अर्थ
सहारे से भी सीमा घटे तो जोड़ की अकड़न की संभावना होती है। खुद हिलाने की क्षमता उससे कहीं कम हो तो रोटेटर-कफ और नस की जाँच चाहिए। गर्दन के संकेत उपचार की दिशा बदल सकते हैं।
सीमाएँ
ये लक्षणों का पैटर्न समझने की जाँचें हैं, किसी एक ऊतक का प्रमाण नहीं। दर्द और बचाव में मांसपेशियाँ कसना, अपनी तथा सहारे वाली दोनों गतियों को प्रभावित करते हैं।
महत्वपूर्ण निष्कर्ष। बाँह बाहर घुमाने की लगातार कमज़ोरी या इन्फ्रास्पाइनस फ़ॉसा में दिखाई देने वाला गड्ढापन, विशेषकर जब कमज़ोरी दर्द से समझ आने वाली सीमा से अधिक हो।
अगला कदम। कंधे और नसों की जाँच कराएँ। नस-मांसपेशी की विद्युत जाँच या इमेजिंग उचित हो सकती है।
गर्दन की नस की जड़ की समस्या: सर्वाइकल रेडिकुलोपैथी[4]
महत्वपूर्ण निष्कर्ष। बाँह के दर्द के साथ सुन्नपन, रिफ़्लेक्स या ताक़त में बदलाव, अथवा गर्दन की गति से स्पष्ट संबंध।
अगला कदम। नीचे बाँह के लक्षणों को कंधे से रेफ़र्ड पेन मानने से पहले गर्दन और नसों की जाँच कराएँ।
उपचार का चुनाव और आगे की योजना
+
स्वास्थ्य पेशेवर द्वारा देखभाल
इन्फ्रास्पाइनेटस के मायोफेशियल दर्द में ड्राई नीडलिंग[1]
कब विचार करें। जाँचे गए कंधे के दर्द में जब इन्फ्रास्पाइनेटस की संवेदनशीलता शिकायत से मेल खाती हो और अस्थायी राहत हाथ पहुँचाने या अभ्यास में मदद कर सकती हो।
योग्य डॉक्टर या फिजियोथेरेपिस्ट स्कैपुलर स्पाइन के नीचे इन्फ्रास्पाइनस फ़ॉसा पहचानते हैं और मांसपेशी का लक्ष्य चुनने से पहले रोटेटर-कफ तथा गर्दन की जाँच करते हैं। खून बहने, संक्रमण और वक्ष की चोट, जिसमें फेफड़े के बाहर हवा भरना (न्यूमोथोरैक्स) भी शामिल है, के जोखिम पर चर्चा होनी चाहिए।
मात्रा और समीक्षा
इस मांसपेशी पर हुए परीक्षण में 1 सत्र दिया गया था। इससे सुई की कोई सार्वभौमिक गहराई या उपचार-सत्रों की तय श्रृंखला नहीं निकलती।
क्रमिक बढ़ोतरी
1 सप्ताह के भीतर शेल्फ़ तक हाथ पहुँचाने, कपड़े पहनने या बाँह बाहर घुमाने का वही काम फिर परखें। उपयोगी गतिविधि सुधरे तभी उपचार जारी रखने पर विचार करें।
कब रोकें या फिर से जाँचें
कंधे के पास नीडलिंग के बाद नया सीने का दर्द या साँस फूलना हो तो तत्काल जाँच कराएँ। नई कमज़ोरी या लंबे समय बने भड़काव के बारे में भी बताएँ।
प्रमाण और सीमाएँ
65 वर्ष या उससे अधिक उम्र के 66 वयस्कों में सक्रिय ट्रिगर पॉइंट की ड्राई नीडलिंग के साथ लेटेंट, यानी दबाने पर संवेदनशील लेकिन अपने-आप दर्द न देने वाले, पॉइंट की नीडलिंग जोड़ने से तुरंत और 1 सप्ताह पर दर्द अधिक सुधरा। पकड़ की ताक़त में अतिरिक्त लाभ नहीं था। दोनों समूहों को ड्राई नीडलिंग मिली थी; टिकाऊ कार्यक्षमता-लाभ या नकली उपचार और पुनर्वास की तुलना में श्रेष्ठता स्थापित नहीं हुई।
स्व-देखभाल और गतिविधि
हाथ पहुँचाने और वज़न उठाने का दर्दनाक भार बदलें[3]
कब विचार करें। बिना चोट शुरू हुआ कंधे का दर्द, जिसमें गतिविधि-संबंधी लक्षण सँभाले जा सकते हों।
कुछ समय शेल्फ़ की ऊँचाई घटाएँ, फेंकने या तैरने का सत्र छोटा करें या वज़न शरीर के पास रखें। लंबे डेस्क-कार्य में अग्रबाहु का सहारा और आराम में तकिया उपयोगी लगे तो इस्तेमाल करें।
मात्रा और समीक्षा
बदलाव उन कामों में करें जिनसे आपके लक्षण उभरते हैं। रोज़ कितनी देर आराम करना है, इसकी एक तय मात्रा नहीं है।
क्रमिक बढ़ोतरी
नींद और दैनिक काम बेहतर होने पर ऊँचाई, दोहराव और वज़न एक-एक करके लौटाएँ।
कब रोकें या फिर से जाँचें
अचानक कमज़ोरी, गर्म सूजे जोड़ या नए नस-संबंधी संकेतों की जाँच टालने के लिए केवल गतिविधि बदलते न रहें।
प्रमाण और सीमाएँ
रोटेटर-कफ की देखभाल में व्यक्ति के अनुसार जानकारी और गतिविधि में बदलाव की सलाह दी जाती है। इससे ट्रिगर पॉइंट को कारण सिद्ध नहीं किया जाता और पूरी तरह आराम करना अनिवार्य नहीं होता।
कब विचार करें। जाँची गई रोटेटर-कफ समस्या जिसमें हल्का प्रतिरोध सहनीय हो और बिना स्पष्ट कारण बहुत कमज़ोरी न हो।
कोहनी मोड़कर शरीर के पास रखें। दूसरी तरफ़ बँधे हल्के बैंड के विरुद्ध अग्रबाहु बाहर घुमाएँ। ऊपरी बाँह को सहारा दें और धीरे लौटें; गति पूरी करने के लिए धड़ न घुमाएँ।
मात्रा और समीक्षा
उदाहरण: एक दिन छोड़कर 8–12 नियंत्रित दोहराव के 1–2 सेट। यह कंधे के क्षेत्र के लिए शुरुआती विकल्प है, इन्फ्रास्पाइनेटस ट्रिगर पॉइंट की प्रमाणित व्यायाम मात्रा नहीं।
क्रमिक बढ़ोतरी
बैंड का प्रतिरोध बढ़ाने से पहले आरामदायक दोहराव बढ़ाएँ। बाद में आपके काम की हाथ पहुँचाने और खेल वाली स्थितियों का अभ्यास करें।
कब रोकें या फिर से जाँचें
अभ्यास के बाद या अगले दिन दर्द अथवा रात के लक्षण बढ़े रहें तो भार घटाएँ। अचानक कमज़ोरी, जोड़ में तीखा दर्द या झुनझुनी हो तो रुकें।
प्रमाण और सीमाएँ
रोटेटर-कफ टेंडिनोपैथी में प्रतिरोध और गति-नियंत्रण वाला सक्रिय पुनर्वास समर्थित है। कोई एक अभ्यास केवल दर्दनाक ट्रिगर पॉइंट पर अलग से काम नहीं करता और न उसकी सबके लिए एक प्रमाणित मात्रा है।
कब विचार करें। दर्द के कारण गति सीमित हो, लेकिन हल्की सहायता से हिलाना आरामदायक लगे।
हाथ मेज़ पर टिकाएँ। शरीर थोड़ा पीछे ले जाते हुए हाथ आगे सरकाएँ और कंधे की आरामदायक सीमा में रहें। बाँह को ज़ोर से पीठ के पीछे न ले जाएँ और स्लीपर स्ट्रेच में सामने की चुभन के बावजूद दबाव न बढ़ाएँ।
मात्रा और समीक्षा
उदाहरण: रोज़ 1 बार 5–8 धीमे स्लाइड, प्रतिक्रिया के अनुसार समायोजित। यह इस मांसपेशी पर हुए परीक्षण का प्रोटोकॉल नहीं है।
क्रमिक बढ़ोतरी
पहले हाथ पहुँचाने की सीमा धीरे-धीरे बढ़ाएँ, फिर हल्की वस्तु लेकर बिना मदद शेल्फ़ की ऊँचाई तक पहुँचने का अभ्यास करें।
कब रोकें या फिर से जाँचें
तीखा अटकाव या जोड़ की बढ़ती अकड़न पर रुकें। सहारे से भी गति काफ़ी कम हो तो क्लिनिकल जाँच चाहिए।
प्रमाण और सीमाएँ
क्षेत्रीय सक्रिय पुनर्वास में उपयोगी गतिविधियों का अभ्यास समर्थित है। यहाँ चुना स्लाइड और उसकी मात्रा व्यावहारिक उदाहरण हैं, प्रमाणित ट्रिगर-पॉइंट रिलीज़ तकनीक नहीं।
स्वास्थ्य पेशेवर द्वारा देखभाल
डॉक्टर या फिजियोथेरेपिस्ट के मैनुअल उपचार का सीमित प्रयास[3]
कब विचार करें। जाँचे गए कंधे के दर्द में जब थोड़ी देर आराम मिलने से व्यायाम करना आसान हो सकता हो।
डॉक्टर या फिजियोथेरेपिस्ट आरामदायक सॉफ़्ट-टिशू या जोड़ की तकनीक आज़मा सकते हैं। फिर वही चुना काम, जैसे हाथ पहुँचाना या प्रतिरोध के विरुद्ध घुमाना, दोहराया जाता है। इसे क्रमिक व्यायाम योजना के साथ इस्तेमाल करें।
मात्रा और समीक्षा
सीमित अवधि का प्रयास करें। अपने-आप कई सत्र तय करने के बजाय उपचार के बाद कार्यक्षमता फिर परखें।
क्रमिक बढ़ोतरी
मिली राहत का उपयोग सक्रिय गति में करें और निष्क्रिय उपचार धीरे-धीरे कम करें।
कब रोकें या फिर से जाँचें
नस के लक्षण उभरें या बार-बार राहत मिलने के बाद भी नींद, हाथ पहुँचाने की क्षमता अथवा ताक़त न सुधरे तो उपचार रोकें।
प्रमाण और सीमाएँ
रोटेटर-कफ दिशानिर्देश थोड़े समय की दर्द-राहत के लिए मैनुअल थेरेपी की अनुमति देते हैं। राहत से पुनर्वास के दौरान हाथ पहुँचाना या घुमाना सुधरे तो इसे जारी रखा जा सकता है। प्रमाण रोटेटर-कफ की स्थितियों पर हैं, केवल इन्फ्रास्पाइनेटस के अलग पॉइंट पर नहीं।
दोबारा जाँच और फ़ॉलो-अप
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शेल्फ़ तक हाथ पहुँचाने या कपड़े पहनने का वही काम और दर्द से बाधित रातों को अपने लक्ष्य के रूप में दर्ज करें।
कोहनी की समान स्थिति और प्रतिरोध के साथ बाहर घुमाने के बल तथा दर्द की अलग-अलग तुलना करें।
अपनी ताक़त से और सहारे से होने वाली गति अलग दर्ज करें। नया लैग, मांसपेशी सिकुड़ना या बढ़ती कमज़ोरी मिले तो फिर जाँच चाहिए।
उपयुक्त सक्रिय देखभाल से कार्यक्षमता न सुधरे तो स्थानीय रिलीज़ दोहराते रहने के बजाय टेंडन फटाव, जोड़ की अकड़न तथा गर्दन या सुप्रास्कैपुलर नर्व के कारण फिर परखें।
कम-से-कम 65 वर्ष के 66 वयस्क; ड्राई नीडलिंग का 1 सत्र। सक्रिय और लेटेंट पॉइंट साथ लेने की तुलना केवल सक्रिय पॉइंट के उपचार से हुई। थोड़े समय के दर्द और दबाव पर दर्द शुरू होने की सीमा में अंतर था, पकड़ की ताक़त में अतिरिक्त लाभ नहीं। नकली उपचार या व्यायाम वाला नियंत्रण समूह नहीं था।
आर्थ्रोस्कोपी के लिए निर्धारित 91 मरीज़। चुनी हुई सर्जरी वाली आबादी और आंशिक तथा पूर्ण फटाव का भरोसे से फ़र्क़ न कर पाने के कारण परिणामों को सभी पर लागू नहीं किया जा सकता।