मायोफेशियल दर्द में मसल रिलैक्सेंट का चुनाव क्यों मायने रखता है

मसल रिलैक्सेंट के मैकेनिज़्म की तुलना

मसल रिलैक्सेंट के मैकेनिज़्म की तुलना

परिचय

मायोफेशियल पेन सिंड्रोम की पहचान ट्रिगर पॉइंट से होती है — मांसपेशी की तनी हुई पट्टियों के भीतर अति-संवेदनशील गाँठें, जो स्थानीय और रेफ़र्ड दोनों तरह का दर्द पैदा करती हैं। फिजियोथेरेपी और ट्रिगर पॉइंट रिलीज़ ही असली, निर्णायक इलाज है — फिर भी, मसल रिलैक्सेंट एक अहम सहायक भूमिका निभाती हैं: वे उस ऐंठन को घटाती हैं जो ट्रिगर पॉइंट को जीवित रखे रहती है, नींद की गुणवत्ता सुधारती हैं, और दर्द को इस हद तक थामती हैं कि पुनर्वास असरदार बन सके।

सारी मसल रिलैक्सेंट एक जैसी नहीं हैं, और सच कहें तो यह नाम भी कुछ हद तक भ्रामक है — इस श्रेणी की कई दवाएँ असल में मांसपेशी के टोन को सीधे नहीं बदलतीं, बल्कि सेडेशन के ज़रिए असर करती हैं। असली फ़र्क़ चार चीज़ों में है: मैकेनिज़्म, आधा-जीवन, लत का जोखिम, और मरीज़-विशिष्ट कारक — जिनसे कोई एक दवा दूसरे की तुलना में बेहतर बैठती है।

टिज़ानिडीन इस श्रेणी की अधिकांश दवाओं से अलग है — यह स्पाइनल इंटरन्यूरॉन के अल्फ़ा-2 एड्रिनर्जिक रिसेप्टर पर सीधे काम करती है। उत्तेजक न्यूरोट्रांसमीटर, विशेष रूप से ग्लूटामेट और सब्सटेंस-पी, का स्राव घटाकर यह दवा सीधे उन अति-उत्तेजित स्पाइनल सर्किटों को शांत करती है जो मायोफेशियल दर्द को बनाए रखते हैं। इसी मैकेनिज़्म के कारण यह नींद को गहरा कर सकती है — बिना उस लंबी सुस्ती के, जो लंबे आधा-जीवन वाली दवाओं से होती है।

पुराने दर्द-प्रबंधन में आधा-जीवन की अहमियत को कम आँकना ग़लती होगी। जो दवा सुबह सात बजे, यानी जब मरीज़ को गाड़ी चलाकर ऑफ़िस पहुँचना हो, तब भी रिसेप्टर पर बैठी हो — वह देर-सबेर या तो छोड़ दी जाएगी, या ग़लत समय पर ली जाने लगेगी। टिज़ानिडीन का दो से चार घंटे का आधा-जीवन यह सुनिश्चित करता है कि सोने से पहले की खुराक सुबह तक काफ़ी हद तक साफ़ हो जाए — और यही फ़ार्माकोकाइनेटिक गुण मायोफेशियल दर्द के सामान्य उपचार-लक्ष्य, यानी रात में मांसपेशी ढीली करना और नींद बहाल करना, के साथ अच्छी तरह बैठता है।

मसल रिलैक्सेंट की प्रोफ़ाइल

मसल रिलैक्सेंट की हर श्रेणी का अपना मैकेनिज़्म, आधा-जीवन और जोखिम-प्रोफ़ाइल है। इन फ़र्क़ों को समझना ज़रूरी है — ताकि सही मरीज़ को सही समय पर सही दवा दी जा सके।

फ़ार्माकोलॉजी

फ़ार्माकोलॉजी

अल्फ़ा-2 एगोनिस्ट का स्पाइनल मैकेनिज़्म

tizanidine (टिज़ानिडीन; भारत में सिर्डालुड और कई अन्य ब्रांड नामों में उपलब्ध; ब्रांड और मूल्य फ़ार्मेसी या निर्माता के अनुसार बदलते हैं)

अल्फ़ा-2 एड्रिनर्जिक एगोनिस्टमैकेनिज़्म: स्पाइनल इंटरन्यूरॉन पर अल्फ़ा-2 एगोनिस्ट के रूप में काम करती है — उत्तेजक न्यूरोट्रांसमीटर (ग्लूटामेट, सब्सटेंस-पी) का स्राव घटाकर स्पास्टिसिटी कम करती है। आधा-जीवन सिर्फ़ दो से चार घंटे — यही इसका सबसे बड़ा फ़ायदा है, क्योंकि सुबह तक दवा का असर ख़त्म हो जाता है और दिन भर सुस्ती नहीं रहती। खुराक: सोने से पहले दो से चार मिग्रा; सहन हो सके तो दिन में तीन बार आठ मिग्रा तक। मुख्य लाभ यह कि बेंज़ोडायाज़ेपीन की तुलना में लत और दुरुपयोग की संभावना कम मानी जाती है। फिर भी अचानक बंद करने पर रिबाउंड हाइपरटेंशन यानी रक्तचाप का एकाएक उछाल और दूसरे रिबाउंड लक्षण उभर सकते हैं, इसलिए डॉक्टर की निगरानी में धीरे-धीरे ही कम करें। मायोफेशियल पेन सिंड्रोम में, ख़ासकर रात के उपयोग में, कुछ समर्थन मिलता है — हालाँकि सीधे इसी रोग पर बड़े रैंडमाइज़्ड क्लिनिकल ट्रायल सीमित हैं; अधिकांश आँकड़े स्पास्टिसिटी और ऑफ़-लेबल अध्ययनों से एक्सट्रापोलेशन पर टिके हैं। एक बात ध्यान रखें: पहले-पास का चयापचय असर अहम है, इसलिए दवा हमेशा भोजन के साथ लें या हमेशा बिना भोजन के — एक ही पैटर्न पर टिकें। दवा-अंतःक्रिया भी गंभीर है: सीवायपी1ए2 अवरोधक जैसे फ़्लुवोक्सामीन और सिप्रोफ्लोक्सासिन के साथ देने पर रक्त-स्तर ख़तरनाक हद तक बढ़ जाता है — यह संयोजन वर्जित यानी निषिद्ध है, इन्हें एक साथ कभी न दें। भारत में टिज़ानिडीन पर्ची-आधारित दवा है; शेड्यूल एच या एच-1 की मौजूदा स्थिति लिखने से पहले सीडीएससीओ या राजपत्र से सत्यापित कर लें।

साइक्लोबेनज़ाप्रिन

ट्राइसाइक्लिक-संबंधित केंद्रीय रूप से असर करने वाली दवाअमेरिका में सबसे ज़्यादा प्रिस्क्राइब की जाने वाली मसल रिलैक्सेंट। इसका मैकेनिज़्म ट्राइसाइक्लिक एंटीडिप्रेसेंट से मिलता-जुलता है — एंटीकोलिनर्जिक प्रभाव के साथ नोरएपिनेफ़्रिन और सेरोटोनिन पर असर। आधा-जीवन अठारह घंटे — यही इसकी बड़ी कमज़ोरी है, क्योंकि सुबह सुस्ती और हैंगओवर जैसा भारीपन बना रहता है। मायोफेशियल पेन सिंड्रोम में पाँच मिग्रा, दस मिग्रा से बेहतर रहती है — असर एक जैसा, पर सुस्ती कम। नींद की गड़बड़ी वाले मरीज़ों में यह उपयोगी हो सकती है। बुज़ुर्गों में इसे टालें, क्योंकि यह बीयर्स क्राइटीरिया की सूची में है। दो-तीन हफ़्ते से ज़्यादा न दें — लंबे उपयोग पर साक्ष्य कम हैं और टॉलरेंस यानी सहनशीलता बन जाती है। भारत में साइक्लोबेनज़ाप्रिन पर्ची-आधारित दवा है; शेड्यूल एच या एच-1 की मौजूदा स्थिति सीडीएससीओ या राजपत्र से सत्यापित कर लें।

बैक्लोफेन (ब्रांड: लायोरेज़ल)

गाबा-बी एगोनिस्टगाबा-बी एगोनिस्ट — मुख्यतः स्पास्टिसिटी में, यानी मल्टीपल स्क्लेरोसिस और स्पाइनल कॉर्ड चोट जैसी स्थितियों में, इस्तेमाल होती है। मायोफेशियल दर्द में सीधा साक्ष्य सीमित है, पर जब साथ में स्पास्टिसिटी का घटक हो या सुप्रास्पाइनल स्तर पर मांसपेशी ढीली करनी हो, तब यह काम की रहती है। अचानक बंद करने पर बैक्लोफेन से गंभीर विदड्रॉल हो सकती है, यानी दवा एकाएक छूटने पर शरीर की तीखी प्रतिक्रिया — बहुत तेज़ बुख़ार, मनोभ्रम, मांसपेशी-कड़ापन, यहाँ तक कि दौरे — और कुछ मामलों में यह जानलेवा भी होती है। इसीलिए हमेशा डॉक्टर की निगरानी में हफ़्तों तक धीरे-धीरे कम किया जाता है। ख़ुद-से कभी अचानक बंद न करें। फ़ायदे की बात यह कि सामान्य खुराक पर इसे लत वाली दवा नहीं माना जाता और नींद के लिए यह उपयोगी रह सकती है। भारत में आसानी से उपलब्ध और सस्ती है।

मेथोकार्बामोल (ब्रांड: रोबैक्सिन)

केंद्रीय रूप से असर करने वाला सेडेटिवइसका मैकेनिज़्म पूरी तरह स्पष्ट नहीं — मांसपेशी को सीधे ढीला करने के बजाय शायद सेडेशन के ज़रिए असर करती है। आधा-जीवन छोटा, क़रीब एक-दो घंटे, फिर भी अक्सर सात सौ पचास से पंद्रह सौ मिग्रा दिन में चार बार दी जाती है। साइड-इफ़ेक्ट का बोझ साइक्लोबेनज़ाप्रिन से कम रहता है। मायोफेशियल पेन सिंड्रोम पर सीधे उच्च-गुणवत्ता वाले अध्ययन कम हैं। कुछ देशों में यह बिना पर्ची मिलती है, हालाँकि भारत में पर्ची-आधारित ही प्रचलित है। तीव्र या अल्पकालिक मांसपेशी-ऐंठन में काम की; पुराने रोग के दीर्घकालिक प्रबंधन में कम उपयोगी।

कैरिसोप्रोडोल (सोमा) — टालें

टालें — असली नशे का जोखिमशरीर में जाकर मेप्रोबामेट बनाती है, जो बार्बिच्युरेट जैसा सेडेटिव है — यही एकमात्र मसल रिलैक्सेंट है जिसमें असली लत और दुरुपयोग का जोखिम रहता है। स्वीडन, नॉर्वे, यूके और यूरोप के कई देशों में यह प्रतिबंधित है। पुराने मायोफेशियल दर्द में इसका उपयोग न करें — शारीरिक निर्भरता का बड़ा जोखिम है। अगर मरीज़ पहले से इस पर हैं, तो धीरे-धीरे टेपर करें, अचानक बंद कभी न करें।

मैकेनिज़्म और आधा-जीवन — एक नज़र में

मायोफेशियल दर्द में मसल रिलैक्सेंट चुनते समय जो फ़ार्माकोकाइनेटिक बात सबसे ज़्यादा मायने रखती है, वह है आधा-जीवन। छोटा आधा-जीवन — टिज़ानिडीन में दो से चार घंटे — सोने से पहले एक खुराक की अनुमति देता है, जो सुबह तक पूरी तरह साफ़ हो जाती है और दिन की कार्यक्षमता पर असर नहीं डालती। लंबा आधा-जीवन — साइक्लोबेनज़ाप्रिन में अठारह घंटे — का मतलब है कि एक रात की खुराक अगले दिन दोपहर तक भी असर बनाए रखती है।

मैकेनिज़्म ही तय करता है कि दवा की क्लिनिकल उपयोगिता क्या है और साइड-इफ़ेक्ट का बोझ कितना। टिज़ानिडीन विशेष रूप से स्पाइनल अल्फ़ा-2 रिसेप्टर पर असर करती है, इसलिए इसका रक्तचाप घटाने वाला असर पूर्वानुमेय और संभाला जा सकने वाला है। साइक्लोबेनज़ाप्रिन का ट्राइसाइक्लिक-जैसा एंटीकोलिनर्जिक प्रोफ़ाइल — मुँह सूखना, पेशाब में अड़चन, कब्ज़, और कुछ लोगों में सोच में सुस्ती या मानसिक धुँधलापन — इसके मुख्य दुष्प्रभाव हैं। कैरिसोप्रोडोल का मेप्रोबामेट में बदल जाना उसे एक सेडेटिव-हिप्नोटिक बना देता है, जिसमें असली निर्भरता का जोखिम है — और यही उसे बाक़ी श्रेणी से अलग करता है।

टिज़ानिडीन का दो से चार घंटे का आधा-जीवन सिर्फ़ एक फ़ार्माकोकाइनेटिक आँकड़ा नहीं है — यही वह क्लिनिकल गुण है जो इसे पुराने मायोफेशियल दर्द के रात के उपयोग के लिए सबसे उपयुक्त विकल्पों में गिनाता है।

दो से चार घंटे

टिज़ानिडीन — सुबह तक साफ़, कोई हैंगओवर नहीं

अठारह घंटे

साइक्लोबेनज़ाप्रिन — अगले दिन दोपहर तक असर

अल्फ़ा-2

टिज़ानिडीन का मैकेनिज़्म — स्पाइनल इंटरन्यूरॉन पर

चुनाव कैसे करें

सही मसल रिलैक्सेंट चुनने के लिए चार चीज़ें मिलाकर देखी जाती हैं — मरीज़ का मुख्य लक्षण-लक्ष्य, सह-रोग, चल रही दवाएँ, और लत का जोखिम। नीचे दिए चार क्षेत्र इसी निर्णय-प्रक्रिया को व्यवस्थित करते हैं।

मुख्य लक्ष्य: नींद बनाम दिन का दर्द

दवा के आधा-जीवन को क्लिनिकल ज़रूरत से मिलानारात या नींद-केंद्रित उपयोग के लिए सोने से पहले टिज़ानिडीन दो से चार मिग्रा या साइक्लोबेनज़ाप्रिन पाँच मिग्रा चुनें, क्योंकि इनका आधा-जीवन छोटा या मध्यम है। दिन की मांसपेशी-ऐंठन में मेथोकार्बामोल लें, और स्पास्टिसिटी साथ हो तो बैक्लोफेन। मायोफेशियल पेन सिंड्रोम में किसी भी संकेत के लिए बेंज़ोडायाज़ेपीन से बचें।

सह-रोगों का आकलन

मरीज़ के व्यक्तिगत जोखिम कारकों के अनुसार चयनबुज़ुर्ग मरीज़ में साइक्लोबेनज़ाप्रिन से बचें क्योंकि यह बीयर्स सूची में है, और टिज़ानिडीन दो मिग्रा को प्राथमिकता दें। हाइपरटेंशन में टिज़ानिडीन रक्तचाप घटाती है — उच्च रक्तचाप वालों में यह फ़ायदेमंद हो सकता है, पर सामान्य रक्तचाप वाले मरीज़ में सावधानी रखें। लिवर रोग में टिज़ानिडीन की ऊँची खुराक पर लिवर-क्षति का जोखिम है, इसलिए बारीकी से निगरानी करें। डिप्रेशन में साइक्लोबेनज़ाप्रिन के ट्राइसाइक्लिक-जैसे मैकेनिज़्म से थोड़ा एंटी-डिप्रेसेंट लाभ मिल सकता है।

लत के जोखिम का आकलन

मसल रिलैक्सेंट शुरू करने से पहले निर्भरता-जोखिम का आकलनलत की चिंता नहीं वाली दवाएँ हैं टिज़ानिडीन, बैक्लोफेन और मेथोकार्बामोल। साइक्लोबेनज़ाप्रिन में मध्यम सहनशीलता बनती है, असली लत नहीं — फिर भी इसका लंबा उपयोग टालें। कैरिसोप्रोडोल में बड़ा लत-जोखिम है, इसे पूरी तरह टालें। बेंज़ोडायाज़ेपीन जैसे डायाज़ेपाम केवल अल्पकालिक तीव्र ऐंठन के लिए — पुराने मायोफेशियल दर्द में कभी नहीं।

दवा-अंतःक्रिया की जाँच

कोई भी मसल रिलैक्सेंट शुरू करने से पहले अहम अंतःक्रियाएँटिज़ानिडीन के साथ फ़्लुवोक्सामीन या सिप्रोफ्लोक्सासिन देना ख़तरनाक है — यह संयोजन वर्जित है। साइक्लोबेनज़ाप्रिन के साथ मोनोएमीन ऑक्सीडेज़ अवरोधक देने पर सेरोटोनिन सिंड्रोम का जोखिम रहता है। बैक्लोफेन के साथ अन्य सीएनएस डिप्रेसेंट देने पर सुस्ती और बढ़ जाती है। सभी मसल रिलैक्सेंट के साथ शराब लेने पर सीएनएस-दमन गहरा जाता है, इसलिए इलाज के दौरान शराब से पूरी तरह परहेज़ करें।

इलाज की दिशा

मायोफेशियल दर्द के लिए मसल रिलैक्सेंट का चयन क्लिनिकल पैटर्न पर तय होता है — लक्षण कब उभरते हैं, मरीज़ की प्रोफ़ाइल क्या है, और इलाज का लक्ष्य क्या है। नीचे दिए रास्ते आम क्लिनिकल परिस्थितियों के लिए व्यावहारिक प्रोटोकॉल का खाका हैं।

पर्ची देने का निर्णय-वृक्ष

पर्ची देने का निर्णय-वृक्ष

मायोफेशियल दर्द के लिए मसल रिलैक्सेंट

रात के मायोफेशियल दर्द का प्रोटोकॉल

नींद से जुड़े मायोफेशियल दर्द में टिज़ानिडीन पहली पसंद रहती है — छोटा आधा-जीवन और अल्फ़ा-2 मैकेनिज़्म गहरी नींद देने में मदद करते हैं, और सुबह तक असर लगभग ख़त्म हो जाता है।

  • सोने से पहले टिज़ानिडीन दो मिग्रा को पहली पसंद रखें; ज़रूरत पड़ने पर चार मिग्रा तक बढ़ाएँ
  • रात में आराम भरी नींद, और सुबह तक मांसपेशी ढीली होने का असर — बिना किसी हैंगओवर के
  • अल्पकालिक भड़काव में, यानी दो-तीन हफ़्ते से अधिक नहीं, विकल्प के तौर पर सोने से पहले साइक्लोबेनज़ाप्रिन पाँच मिग्रा
  • सहायक रूप से मैग्नीशियम ग्लाइसिनेट दो सौ से चार सौ मिग्रा — मांसपेशी-शिथिलन में तालमेल वाला सहायक असर हो सकता है
  • टिज़ानिडीन शुरू करने के पहले कुछ दिनों में और हर खुराक-वृद्धि के समय सुबह रक्तचाप गिरने, चक्कर और सुस्ती की संभावना रहती है — खड़े होने से पहले एक मिनट बैठ लें; जब तक असर का अंदाज़ा न लग जाए, तब तक गाड़ी न चलाएँ, मशीन न चलाएँ या ऊँचाई पर काम न करें

दिन की ऐंठन का प्रबंधन

दिन के समय की मांसपेशी-ऐंठन के लिए ऐसी दवा चाहिए जिसका आधा-जीवन छोटा हो या जो विशेष रूप से स्पास्टिसिटी में अनुशंसित हो — ताकि सुस्ती रोज़मर्रा के काम में बाधा न डाले।

  • तीव्र भड़काव में मेथोकार्बामोल सात सौ पचास मिग्रा, दिन में तीन-चार बार
  • स्पास्टिसिटी का घटक हो तो बैक्लोफेन पाँच से दस मिग्रा, दिन में तीन बार
  • पुराने उपयोग में टिज़ानिडीन दो मिग्रा, दिन में तीन बार — शुरू करने से पहले बेसलाइन और फिर एक, तीन, छह महीने पर रक्तचाप तथा लिवर एंज़ाइम जाँचें
  • ऑफ़िस या काम के घंटों में साइक्लोबेनज़ाप्रिन से बचें — अठारह घंटे का आधा-जीवन दोपहर तक सुस्ती बनाए रखता है
  • दिन के समय असली समाधान फिजियोथेरेपी और ट्रिगर पॉइंट रिलीज़ ही रहता है — दवा सहायक है, मूल इलाज नहीं

विशेष परिस्थितियों में चयन

बुज़ुर्ग मरीज़, सह-रोगों वाले लोग, गर्भावस्था और अंग-विकार में मसल रिलैक्सेंट का चयन सोच-समझकर बदलना पड़ता है।

  • बुज़ुर्ग में सिर्फ़ टिज़ानिडीन एक से दो मिग्रा रखें — गिरने और रक्तचाप गिरने का जोखिम; साइक्लोबेनज़ाप्रिन से बचें क्योंकि यह बीयर्स सूची में है
  • गर्भावस्था में इन मसल रिलैक्सेंट की मानव-गर्भावस्था में सुरक्षा के पुख़्ता प्रमाण नहीं हैं; जब तक डॉक्टर ज़रूरी न समझें, तब तक टालें। शुरुआत में पैरासिटामोल और फिजियोथेरेपी पर विचार करें
  • लिवर रोग में टिज़ानिडीन से बचें; इसके बजाय मेथोकार्बामोल या सावधानी के साथ कम खुराक में बैक्लोफेन
  • किडनी की कमज़ोरी में बैक्लोफेन की खुराक काफ़ी घटाएँ, क्योंकि यह किडनी से बाहर निकलती है
  • हाइपरटेंशन में टिज़ानिडीन का रक्तचाप घटाने वाला असर कम तकलीफ़देह हो सकता है, पर यह उच्च-रक्तचाप की दवा नहीं है — अपनी हाइपरटेंशन की दवाएँ नियमित जारी रखें; निगरानी ज़रूरी

दवा कम करना और बंद करना

अधिकांश मसल रिलैक्सेंट को सुरक्षित ढंग से बंद करने के लिए धीरे-धीरे टेपर ज़रूरी है। बैक्लोफेन को अचानक बंद करना मेडिकल इमरजेंसी है; बाक़ी दवाओं में भी क्रमिक कमी ही सही रास्ता है।

  • बैक्लोफेन कभी अचानक बंद न करें — दौरे का जोखिम; डॉक्टर की निगरानी में हफ़्तों तक टेपर
  • टिज़ानिडीन धीरे-धीरे बंद करें — अचानक रोकने पर रिबाउंड हाइपरटेंशन हो सकती है यानी रक्तचाप एकदम उछल सकता है
  • साइक्लोबेनज़ाप्रिन को दो-तीन हफ़्ते के बाद टेपर करें — रिबाउंड ऐंठन और नींद की गड़बड़ी से बचाव होता है
  • कैरिसोप्रोडोल को कई हफ़्तों में धीरे-धीरे टेपर करें — विदड्रॉल गंभीर हो सकती है, क्योंकि मेप्रोबामेट की निर्भरता बनती है
  • चार हफ़्ते से अधिक किसी भी मसल रिलैक्सेंट को जारी रखने से पहले असली कार्यात्मक सुधार दर्ज करें

रेड फ्लैग — ख़तरनाक संयोजन और दुरुपयोग

मसल रिलैक्सेंट से जुड़े अधिकांश गंभीर परिणामों से बचा जा सकता है — सोच-समझकर पर्ची देने और निगरानी रखने से। नीचे दी स्थितियाँ या तो किसी गंभीर नुक़सान को रोकने के लिए तत्काल बदलाव माँगती हैं, या ग़लत प्रिस्क्राइबिंग को सुधारने की — जो लंबे समय चलती रहे तो बड़ी समस्या बन सकती है।

मुख्य बिंदु
  1. कई मायोफेशियल दर्द मरीज़ों के लिए, ख़ासकर नींद से जुड़े मामलों में, टिज़ानिडीन एक उपयुक्त विकल्प मानी जाती है — अल्फ़ा-2 मैकेनिज़्म रात के उपयोग के लिए सही बैठता है, लत का जोखिम कम माना जाता है, और दो से चार घंटे का आधा-जीवन सुबह के हैंगओवर से बचाता है।

  2. साइक्लोबेनज़ाप्रिन असरदार है, पर इसका अठारह घंटे का आधा-जीवन रोज़ाना के लंबे उपयोग के लिए बहुत ज़्यादा है — इसे दो-तीन हफ़्ते की तीव्र भड़काव अवधि तक ही सीमित रखें; लंबे रोज़ाना उपयोग पर साक्ष्य कम हैं और सहनशीलता बन सकती है।

  3. कैरिसोप्रोडोल यानी सोमा को पुराने मायोफेशियल दर्द में कभी इस्तेमाल नहीं करना चाहिए — यही एकमात्र मसल रिलैक्सेंट है जिसमें असली लत का जोखिम है, और यह स्वीडन, नॉर्वे तथा यूके समेत कई देशों में प्रतिबंधित है।

  4. टिज़ानिडीन के साथ फ़्लुवोक्सामीन या सिप्रोफ्लोक्सासिन का संयोजन ख़तरनाक है और बिल्कुल वर्जित है — टिज़ानिडीन शुरू करने से पहले हमेशा सीवायपी1ए2 अवरोधकों की जाँच ज़रूर कर लें।

  5. कोई भी मसल रिलैक्सेंट ट्रिगर पॉइंट का असली इलाज नहीं करती — ये ऐंठन घटाती हैं, नींद बेहतर करती हैं, और दर्द को इस हद तक थामती हैं कि असली समाधान, यानी फिजियोथेरेपी और मूव्हमेंट थेरेपी, अपना काम कर सके।