ट्रांसवर्सस एब्डोमिनिस
स्थान। पेट की गहरी दीवार
दर्द कहाँ महसूस होता है। पेट के गहरे हिस्से में, कमर के निचले हिस्से में
- पेट का गहरा हिस्सा
- कमर का निचला हिस्सा
- पेल्विक क्षेत्र
ट्रांसवर्सस के ट्रिगर पॉइंट सक्रिय होने पर पेट की दीवार में एक गहरा, अंदरूनी अंगों जैसा महसूस होने वाला दर्द उठता है
स्थान। पेट की गहरी दीवार
दर्द कहाँ महसूस होता है। पेट के गहरे हिस्से में, कमर के निचले हिस्से में
पेट में गहरा दर्द. ट्रांसवर्सस के ट्रिगर पॉइंट सक्रिय होने पर पेट की दीवार में एक गहरा, अंदरूनी अंगों जैसा महसूस होने वाला दर्द उठता है
कमर के निचले हिस्से में दर्द. ट्रांसवर्सस एब्डोमिनिस लंबर-पेल्विक क्षेत्र को स्थिर नहीं रख पाती, तो वहाँ का दर्द कमर के निचले हिस्से तक रेफ़र होकर महसूस होता है
कोर की अस्थिरता. गहरी कोर मसल कमज़ोर पड़ने से धड़ कमज़ोर लगने लगता है और ऐसा महसूस होता है जैसे शरीर को भीतर से सहारा नहीं मिल रहा
कमज़ोर कोर. जब ट्रांसवर्सस एब्डोमिनिस की ट्रेनिंग न हो, तो यह भार पड़ने पर रीढ़ को ज़रूरी सहारा नहीं दे पाती
गर्भावस्था. गर्भावस्था में पेट की दीवार खिंचने से ट्रांसवर्सस एब्डोमिनिस के फाइबर्स कमज़ोर और लंबे हो जाते हैं
ग़लत मुद्रा (poor posture). लगातार झुकी हुई पोज़िशन में रहने से ट्रांसवर्सस एब्डोमिनिस का स्वतः सक्रिय होने वाला (feed-forward) पैटर्न धीरे-धीरे रुक जाता है
पहले हुई कोई सर्जरी. पेट की सर्जरी के चीरे ट्रांसवर्सस के फाइबर्स को बाधित करते हैं और मसल को सक्रिय करने वाले मोटर-कंट्रोल पैटर्न बदल देते हैं
पीठ के बल लेटें, घुटने मोड़ें और पैरों के तलवे फ़र्श पर रखें। एक हाथ छाती पर और दूसरा हाथ पेट के निचले हिस्से पर रखें। नाक से गहरी साँस लें और साँस को पेट की तरफ़ ले जाएँ, ताकि नीचे वाला हाथ ऊपर उठे और छाती वाला हाथ स्थिर रहे। होंठ हल्के सिकोड़कर धीरे-धीरे साँस छोड़ते हुए पेट के निचले हिस्से को रीढ़ की तरफ़ हल्के से अंदर खींचें — बिना कमर को चपटा किए और बिना साँस रोके। यह डायाफ्राम के साथ ट्रांसवर्सस एब्डोमिनिस के स्वाभाविक तालमेल को फिर से सक्रिय करता है।
पीठ के बल लेटें और घुटने मोड़ें। उँगलियों के सिरों से पेट की निचली दीवार में हल्का दबाव दें — दोनों कूल्हे की हड्डियों से लगभग 2 इंच (5 सेंटीमीटर) अंदर की तरफ़, जहाँ ट्रांसवर्सस एब्डोमिनिस सबसे गहराई में होती है। धीमा, टिकाऊ और सहने लायक दबाव डालें और जो जगहें ज़्यादा दर्द भरी हों वहाँ 30-60 सेकंड तक दबाव बनाए रखें। दबाव के दौरान गहरी साँस लेते रहें। एक कूल्हे की हड्डी से दूसरी तक पेट के निचले हिस्से में क्रम से काम करें, लेकिन बीच की लाइन (मिडलाइन) पर और किसी भी सर्जरी के निशान पर सीधे दबाव न दें।
पीठ के बल लेटें, हाथ छत की ओर सीधे उठाएँ और कूल्हों व घुटनों को 90 डिग्री पर मोड़ें। पेट के निचले हिस्से को हल्के से अंदर खींचकर गहरी कोर को सक्रिय करें। धीरे-धीरे दायाँ हाथ सिर के पीछे की तरफ़ ले जाएँ और साथ ही बायाँ पैर फ़र्श की तरफ़ नीचे ले जाएँ — और इस दौरान कमर का निचला हिस्सा फ़र्श से पूरी तरह सटा रहे। शुरू की स्थिति में लौटें और दूसरी तरफ़ से दोहराएँ। अगर कमर फ़र्श से ऊपर उठने लगे, तो हाथ और पैर को इतना दूर न ले जाएँ।
कोहनियों और घुटनों पर टिककर मॉडिफ़ाइड प्लैंक पोज़िशन लें। पोज़िशन रोकने से पहले नाभि को रीढ़ की तरफ़ हल्के से अंदर खींचकर ट्रांसवर्सस एब्डोमिनिस को सक्रिय करें। रीढ़ को सीधा (न्यूट्रल) रखें — कूल्हे न तो नीचे झुकें और न ही ऊपर उठें। शुरुआत में 10-15 सेकंड रोकें और इस बीच सामान्य रूप से साँस लेते रहें। जब आप मॉडिफ़ाइड प्लैंक को सही गहरी कोर एंगेजमेंट के साथ 30 सेकंड तक रोक पाएँ, तो पंजों के बल पूरे प्लैंक की तरफ़ बढ़ें।
कोई भी सामान उठाने से पहले पेट के निचले हिस्से को हल्के से अंदर खींचकर ट्रांसवर्सस एब्डोमिनिस को सक्रिय करें और उठाते समय साँस छोड़ें। बिस्तर से उठते समय सीधे बैठने की कोशिश न करें — पहले एक करवट लें (लॉग-रोल करें) और फिर उठें, ताकि गहरी कोर पर अचानक भार न पड़े। खाँसते या छींकते समय हाथों से पेट को सहारा दें, ताकि कमज़ोर ट्रांसवर्सस को मदद मिल सके। ज़ोर लगाते वक़्त साँस रोककर रखने से बचें — इससे पेट के अंदर का दबाव बढ़ता है, लेकिन ज़रूरी मसल सहारा नहीं मिलता।
अगर 4 हफ़्ते सेल्फ़-केयर के बाद भी पेट का गहरा दर्द और अस्थिरता बनी रहे, तो कोर रिहैब में अनुभवी फिजियोथेरेपिस्ट से सलाह लें। वे डायस्टेसिस रेक्टी (diastasis recti), पेल्विक फ़्लोर डिसफ़ंक्शन और मोटर-कंट्रोल पैटर्न में आई गड़बड़ी की जाँच कर सकते हैं — ये समस्याएँ अक्सर ट्रांसवर्सस एब्डोमिनिस ट्रिगर पॉइंट्स के साथ साथ चलती हैं। रियल-टाइम अल्ट्रासाउंड बायोफ़ीडबैक से आप ख़ुद देख पाते हैं कि ट्रांसवर्सस सही तरीक़े से सिकुड़ रही है या नहीं, और इसी से उसे फिर से ट्रेन किया जा सकता है — गर्भावस्था या पेट की सर्जरी के बाद यह ख़ास तौर पर मददगार होता है।